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पहले गैर...
“
पहले गैर बनके हंसते थे वो, कोई शिकवा न था, मुझे बेगानेपन से । अब अपना लिया है मुझे तो, डर लगने लगा है मुझे, अपनेपन से ।
”
By
सागर जी
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