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नफरत की आग मे...
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नफरत की आग...
“
नफरत की आग मे जलता शहेर देखा है उस मासुम की आँखों मे मैने कहेर देखा है !! बड़े हौसलों से उठा कर, जो कंधों पे फिरते है लाशें दबी सहेमी रात का वो मंजर देखा है !! जब कीड लग जाती है सियासात की जड़ो मे, तब कट्टता हुआ हर एक शजर देखा है !!
”
By
Mohammed Khan
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