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निसर्ग...
निसर्ग को बर्बाद...
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निसर्ग को...
“
निसर्ग को बर्बाद कर मनुष्य अपनी साँसें कम कर रहा है, अपने ही स्वार्थ के वश में हो कर अपने ही प्राण हर रहा है।
”
By
Juhi Grover
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निसर्गप्रेम
मेरीबर्बादीकीतूहीवजहरे
मनुष्य
यहआकाशनीलानहोता।गरजहांकेप्राणियोंमें
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Juhi Grover
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