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मुझसे लिखवा...

मुझसे लिखवा लिजिये जितना मुझे बोलना नहीं आता अपने शब्दों के गिरहों को खोलना नहीं आता जुबां से बोली हुई बातें हवा में ही रह जाती है कलम से लिखी हुई बातें ही अपनी राह बनाती है -कंचन प्रभा

By Kanchan Prabha
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