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मुझसे लिखवा...
“
मुझसे लिखवा लिजिये जितना मुझे बोलना नहीं आता अपने शब्दों के गिरहों को खोलना नहीं आता जुबां से बोली हुई बातें हवा में ही रह जाती है कलम से लिखी हुई बातें ही अपनी राह बनाती है -कंचन प्रभा
”
By
Kanchan Prabha
376
जुबां
कलमकासाथ
बोलना
गिरह
लिखना
आणिनितीमत्ताजिवनाचेहेत्रीसुत्रअंगिकारूनचालतराहणे.हाचजीवनप्रवासहोय.🌸अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि🌸भंडारा
कंचन प्रभा
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Kanchan Prabha
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