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मोहब्बत की...

मोहब्बत की कश्ती बिन सहारे के हो नहीं सकती, सुन, मुसाफिर! गुज़ारा हो भी जाये लेकिन इस दिल को गंवारा नहीं होता।।

By Jitendra Vijayshri Pandey
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