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मंजिले...
“
मंजिले धुंधली हो गई है, रास्ते अनजाने हो गए है, अब यह बस चारो ओर अंधेरा है जिससे मै वाकिफ हूं, मै भटका सा मुसाफिर हूं।
”
By
Mukeshya's Diary
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मुसाफिर
unrequited
darkness
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