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मेरी ही...
“
मेरी ही ख्वाहिशों में जीना ये हसरत तुझे भी थी, तुझे हरपल देखने कि आदत मुझे भी थी, मर मिटने वाला इश्क़ है ये कहने की अब ज़रूरत थी, क्यों मजबूरियों से बंधे रहे हम, बेइंतहां मोहब्बत तो तुझे भी थी और मुझे भी थी।।
”
By
Vasudha Khandare
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इश्क
बेइंतेहा
मोहब्बत
ज़रूरत
आदत
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hindi quote
from
Vasudha Khandare
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