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मेरे कब्र...

मेरे कब्र पर आंसू मत बहाना,। बहुत सैलाब देखें हैं ज़िन्दगी ने हो सके तो मुस्कुराहटों के दो फूल बिखेर आना तब शायद निजात मिले सफर आखरी में कंचन पाण्डेय

By Kanchan Pandey
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