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मैं समय...

“ मैं समय हुं। इतिहास बनकर,नया इतिहास बनाता मैं, नये रुप, रंग,आशा की किरणों का आकार हुं। तन-मन में छा कर,कभी भी ऐसे ही नहीं जाता, परिवर्तनशील लम्हों का स्वरुप साकार हुं। ✒Sheetal Bhatiya 🌠Swapnil ”

By Sheetal Raysoni
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