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मानव मौसम...
“
मानव मौसम की तरह, पल-पल बदले रूप । कभी लगे कुहरा घना, कभी सुनहरी धूप ।। ✍️ अरविन्द त्रिवेदी
”
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अरविन्द त्रिवेदी
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