STORYMIRROR

लबो पे जो...

“ लबो पे जो ख़ामोशी थी भीतर उसने बहुत शोर मचाया हुवा था लब भलेही खामोश थे पर वो आंखे भीतर मचे उस तूफान की गवाही देरही थी ! ”

By Tejeshwar Pandey
 299