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लौट आओ अब ,...

लौट आओ अब , दिल तुम्हे पुकार रहा है , खुद के जज़्बातों से खुद ही हार रहा है , मिलन का मरहम कब लगेगा इन घावों पर , आजकल दिल ही दिल को चोटें मार रहा है ।

By Prashi Joshi
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