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क्यों अब भी...

“ क्यों अब भी बातों को तेरी याद करते है, तुमसे मिल पाएँगे यह फरियाद करते है, यूँ ही अपनी ज़िंदगी बर्बाद करते है। ”

By Madhurendra Mishra
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