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क्या कहूँ...

“ क्या कहूँ इंसान को क्या हो रहा है हर घड़ी ईमान अपना खो रहा है गिर गया है ग्राफ़ मानवता का नीचे अपने नैतिक मूल्य मानव खो रहा है आधुनिक बनने की चाहत में कहीं तू कांटे राहों में किसी के बो रहा है —महावीर उत्तराँचली ”

By Mahavir Uttranchali
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