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कुंडलिया...

कुंडलिया छंद दंगाई जो देश का ,करते हैं नुकसान। उनको प्यारा है नहीं ,अपना हिंदुस्तान। अपना हिंदुस्तान ,सभी को गले लगाए। सत्य अहिंसा प्रेम,त्याग का पाठ पढ़ाए। करते तिल का ताड़ ,बनाते पर्वत राई। करते हैं बदनाम ,धर्म को सब दंगाई।।

By डाॅ. बिपिन पाण्डेय
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