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ख़ाक को उड़ते देखा...
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ख़ाक को उड़ते...
“
ख़ाक को उड़ते देखा तो यूँ लगा कि अभी तो गुलाम हैं हम, चल बसें तो परवाज़ मिले। -दिशा"नवोदिता"
”
By
Disha Gaur
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Disha Gaur
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