STORYMIRROR

कभी कभी...

“ कभी कभी हमारी खुशियो का राज़ हम स्वयं होते है पर कुदरत भी क्या चीज़ है... हमारी खुशियो को हमसे क्षणभर मे ही छीन लेती है। ”

By Tripti Singh
 158