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कब किसी का...

कब किसी का दिया हुआ गम मेरी आँख से टपके आँसू बन के कब मुझे आगे है बढ़ना अतीत की लाश से गुज़र के कैसे दूँ तुमको सहारा ये बात सोचती हूँ जब खुद ढो रहीं ज़िन्दगी का बोझ अपने घुटनों पे चल के

By Ashi Sachdeva
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