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जब बिलखी...
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जब बिलखी...
“
जब बिलखी बेदर्दियां, दीवारें गई थी सहम दया-धर्म के इस जहान में, किस कोने बची है रहम। अर्चना कोचर
”
By
Archana kochar Sugandha
34
बेदर्द
बिलख
मोहब्बतकाअंदाजहैशायरानाबनजाएनाकोईभीअफसानाउल्फतमेंहैसाराजमानाहोमिलनकीबेलाआशिकाना
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Archana kochar Sugandha
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