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ज़माने में...
“
ज़माने में ये पाकीज़ा मोहब्बत ही एक हक़ीक़त है, इस उल्फ़त को मै अपने दिल से इकबाल लिखता हूँ। 'मुरली' तेरे ही ज़िक्र से सजाता हूँ मैं इश़्क की ग़ज़ल, तेरी यादों को ही कलम से मैं अपनी ढाल लिखता हूंँ। -धनजीभाई गढीया"मुरली"
”
By
Dhanjibhai gadhiya "murali"
4
मोहब्बतकाअंदाजहैशायरानाबनजाएनाकोईभीअफसानाउल्फतमेंहैसाराजमानाहोमिलनकीबेलाआशिकाना
पाकिजा
मोहब्बत
इकबाल
जिक्र
ग़ज़ल
कलमकासाथ
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