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इस कदर...

इस कदर बनाया है तुझे रब ने, जुबान भी सोचने लगा है, इश्क़ आंखो से झलकने से पहले, ये दिल भी, कुबूल है कुबूल है बोलने लगा है।

By Soubhagya Sahu
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