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ग़ैरों के मुखौटे...
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ग़ैरों के...
“
ग़ैरों के मुखौटे क्यों ?तुम अपने आपको ही क्यों नहीं देखते ? आईने में ,हर दिन, एक नया चेहरा नजर आता है।
”
By
Laxmi Tyagi
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Laxmi Tyagi
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