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द्वितीय...
“
द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका से, उबरी नहीं धरती अब तक, क्यों भूल गया विश्व वह दिन, हीरोसीमा नागासाकी पर बम गिरा था जब। दो विश्वयुद्ध की दोहरी मार से, हुआ था जो प्रकृति का शमन, क्यों थोप रहे तृतीय विश्वयुद्ध, कुछ तो करो अंजाम का चिंतन।
”
By
ca. Ratan Kumar Agarwala
55
अविरामयुद्ध
अंजाम
प्रकृति
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