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अज्ञान का...

“ अज्ञान का था तम घोर प्रबल, खोले गुरु ने ज्ञान के चक्षु, दिया ज्ञान का भंडार खोल कर, शिष्य जब बना ज्ञान का भिक्षु। श्रम के दीये जलाकर गुरु ने , शिष्य को दिए ज्ञान के मोती, अथक श्रम किया शिष्य ने भी, पा ली ज्ञान की प्रखर ज्योति। ”

By ca. Ratan Kumar Agarwala
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