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दृष्टि, जिस...

दृष्टि, जिस रूप में देखना चाहे, वस्तु का यदि वही रूप देख पाए तो यह दृष्टिदोष होता है। प्रत्येक वस्तु, स्थूल दृष्टि से देखे जा सकने से अधिक रूपों में होती है। वस्तु के उसके समग्र स्वरूप में देख सकने वाली दृष्टि ही निर्दोष दृष्टि है। हम वस्तु को समग्र रूप में देख न पाएं, हानि नहीं - मगर यह स्वीकार करें कि हम वस्तु स्वरूप के पूर्ण ज्ञाता नहीं हैं। वस्तु को जाने बिना निष्कर्ष कहना अनुचित होता है। rcmj

By Rajesh Chandrani Madanlal Jain
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