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धुआं धुआं...

“ धुआं धुआं हो चुका हूं बस कोई कश सा खींच ले फिर भले जहां ए बादल में यूहीं भटक जाऊ पर किसिके दर्द लेकर जिंदगी मुनासिब तो होगी । ”

By abhishek vadodariya
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