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ढलते-ढलते.. ढल...
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ढलते-ढलते.....
“
ढलते-ढलते.. ढल जाएंगे.. बिना “जल” के “जल” जाएंगे। बिना जल के “जलते-जलते” हम सोचो कैसा कल पाएंगे ?
”
By
Govind Singh
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हमप्यारऔररिस्तोंकोकिसीकेदिलपरजबरदस्तीथोपनहीसकते।🌸अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि🌸
कलमकासाथ
waterwoes
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Govind Singh
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