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भाई से...

भाई से बहना कहे,होते नहीं अधीर। हम दोनों है साथ हैं,फिर ये कैसी पीर। फिर यह कैसी पीर,विकट किस्मत का खेला। छूटा घर का साथ,रोक यह आँसू रेला। कहती अनु यह देख,अजब यह विपदा आई। जंगल की यह आग,बुझे अब कैसे भाई। अनुराधा चौहान

By anuradha chauhan
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