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"बाहों के...

"बाहों के झूले" अद्भुत रही प्रेम की बगिया झूमी राधा, नाची सखियां रास रचईया ने छेड़ा साज़ बाँसुरी बनी ह्रदय की आवाज़ वो पनघट भी खूब रहा जहाँ बीती रात कमल दल फूले नैनों की डाली पर पड़े बाहों के झूले

By Manpreet Makhija
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