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अपने कर्मों...

अपने कर्मों के माध्यम से अपना नाम अमर कर लेने की भावना अच्छी है - मगर स्वार्थ पूर्ण है। अच्छे कर्म - 'अच्छाई और सच्चाई की समाज परंपरा रहे', इस भाव से प्रेरित हों तब वह परोपकार होता है।

By Rajesh Chandrani Madanlal Jain
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