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अनकहीं होती...

अनकहीं होती है रिश्तों की आंखमिचोली, ज्यादा पास रहने पर बुराई दिखने ही लगती है और सामने वाला ग़टर जैसा बदबू करता है, और जाने पर अच्छाई याद आती हीं है और वही गटर अनमोल लगता और खूबसूरत फूल की तरह खुशबू करता है।

By Amitosh Sharma
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