STORYMIRROR

|| अनजान...

|| अनजान सफ़र || फ़िर एक रेलवे स्टेशन , फिर एक ट्रेन का इंतजार ! फिर एक सफर , फिर उसी उधेड़ पन मैं उलझा मन की , न जाने ये जिंदगी की गाड़ी कहां जाकर ठहरेगी , एक सुकून भरी सांस अब कहां जाकर मिलेगी ! - शुभम पाटीदार

By Shubham Patidar
 129