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अगर समझना...

“ अगर समझना है परोपकार की भावना, और सुनना है गर किसीसे संघर्षों की व्यथा, तो ढूंढो और पढ़ो नदी की आत्मकथा, जिसे पढ़कर बदल देंगे आप, अपने अंदाज़-ए-जीने की प्रथा। ”

By Mr. Akabar Pinjari
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