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आज जमी हैं...

आज जमी हैं महफ़िल यारों की, खोल के दिलों का दर्द सारों की, अंदाज अलग हैं हर एक के, मगर मंजर एक हैं हर दर्द का.. .....किशोर

By किशोर टपाल
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