STORYMIRROR

मंज़िल यारों बचपन के दोस्त, हम भी थे चार। को कैसे भी हमनें दिन कितने टहलना चार चांद अपनोसेदुश्मनीकरजातेहैंलोग।आड़ेवक्तपरअपनेहीकामआतेहैं चार दिन की चाँदनी उदासी हमें अमावस्या ने तो आना ही चार-चांद पुराण यादें चार बजे सफ़र दुख-दर्दकेआँसूतकपीजातेलोग तस्लीमवो पुलिस एनकाउंटर भी करतीं हैं

Hindi चार वेद Quotes