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Sunny prajapati

Others

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ज़िंदगी एक सफर

ज़िंदगी एक सफर

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ज़िंदगी जब मिली तो पाँच साल

तक होश नहीं

अगले पाँच साल गुजरे, जीने में

कोई जोश नहीं!

 

अब पाँच साल जो बढ़ गए,

बुरी संगत में पढ़ गए

दोस्ती यारी में किसी को गले

लगाया तो किसी से लड़ गए!

 

उम्र 20 तक टेंशन पढ़ाई की फिर

आगे, फिक्र नौकरी में घुमाई की

थोड़ा सा जो कमाने लगे,

बातें होने लगीं शादी और सगाई की !

 

उम्र 30 जो पार की पाया बीबी,

बच्चे और परिवार

एक तरफ परिवार का प्यार तो

दूसरी ओर फरमाइश बेशुमार !

 

बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च,

होता है मुश्किल फर्ज़

इन सब खर्चो से जो निपटे,

साथ लगा रहता है कोई मर्ज !

 

40 साल यूँ ही गुज़र गए नौकरी,

घर और बाज़ार

ज़िंदगी का ये मुकाम पाकर

समस्याएँ होती हैं हज़ार !

 

5-10 साल जो अब के पुराने,

बच्चे हो गए बड़े

ख्यालात हमारे उन्हें लगे पुराने,

छोटी - छोटी बातों पर अकड़ें !

 

अब बच्चों की शादी और अपनी

बीमारी, टेंशन है बहुत सारी

50 की उम्र गुज़र गयी देख ली

हमने दुनियादारी !

 

पोते मे अपना बचपन देखा

अब हमारा जमाना ढल गया

चार कंधो की जरूरत पड़ी

जो बचा था वो भी जल गया !

 

चार दिन की ज़िंदगी, इसमे

कई बवाल हैं

मरने से दिल डरता है,

जीने में बुरा हाल है !

 

ख़ुशी है थोड़ी सी और आफतें

तमाम हैं

हर एक दिन गुज़ारना,

लगता नया मुकाम है !

 

ज़िंदगी उधार है तुम पर,

ईमानदारी से इसे चुकता करना

भला किसी का कर न सको तो

बुरा किसी का मत करना !

 

                                                        



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