वह चलती गई बस चलती गई...
वह चलती गई बस चलती गई...
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पाँच साल की वह लड़की,
न सपने वह देख पाती
न रो पाती न गा पाती
बस चलती गई वह चलती गई।
थाली रखकर नीचे
चलती गई वह ऊपर
लाल रंग से गाल रंग कर
पीली फॉक पहनकर
वह चलती गई बस चलती गई।
न जाने क्या होती है गुड़िया
बन गई वह खुद एक पुड़िया।
पैसे तो उसने खुब कमाया,
पर बचपन तो बेच आया।
वह चलती गई उस रस्सी पर,
वह चलती गई बस चलती गई।
तमाशा वह दिखाती गई
सपने वह अपने छोड़ती गई
बचपन वह अपना भूलती गई
बस चलती गई वह चलती गई।
