STORYMIRROR

Sambardhana Dikshit

Children Stories

4  

Sambardhana Dikshit

Children Stories

सुपर नानी जी

सुपर नानी जी

1 min
162


छुट्टियों का मतलब ननिहाल हमारा बसेरा,

शाम को बच्चों-बड़ों का आंगन में था लगता डेरा ।

खेल-खेल में देती नानी बहुत सारा ज्ञान,

कहती , करो हमेशा बड़ों का मान ।

गांव में मेले जब भी लगते थे ,

हम बच्चों को संग वह ले जाती थी ।

मेले का हर कोना घूमाती थी , 

झूलों पर झूलवाती और खिलौने खरीद देती थी ।

गर्मी में आम खट्टे, शरद में बेर मीठे हैं

फलों का लुफ्त हम आज भी बड़ा उठाते हैं ।

बगीचा इतना बढ़ा कि चलते चलते हम थक जाते हैं ,

आप हो साथ तो हम सब भूल जाते हैं ।

आप आज भी उस कुर्सी पर बैठकर हमें कहानियां सुनातीं हैं,

आप आज भी उस चश्मे से अखबार और किताबें पढ़ती हैं।

छिपाए नहीं छिपता आंखों में दिख जाता है,

आपकी वो हर चीज़ यहां आपकी मौजूदगी दर्शाता है ।

अब हालात कुछ बदल से गए हैं,

हम नहीं ,ऐसा लोग हमें बताते हैं ।

लोग ऐसा क्यों कहते हैं कि आप अब नहीं रही ं

जबकि हमारी हर नज़र में आप ही रहती हैं ।

क्या हकीकत क्या वहम है,

ये हम नहीं जानते हैं...

आप कल भी थी , आज भी हैं 

और हमेशा हमारे साथ ही रहेंगीं...

हमारी सुपर नानी - जी।।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sambardhana Dikshit