STORYMIRROR

Mrityunjay Kumar

Children Stories Children

4  

Mrityunjay Kumar

Children Stories Children

पल पल जीतती हूँ

पल पल जीतती हूँ

1 min
0

पल पल जीतती हूँ तेरे नाम,  

तिरंगे के साथ लहराता मेरा अरमान.  

छत पे बैठी रात के साये तले,  

सपने भी अब उड़ने लगे हवा के जले।


आज़ादी सिर्फ जंग का किस्सा नहीं,  

ये तो हर उस लम्हे का नशा है सही।  

जब मैंने खुद से प्यार किया,  

तब जाके आजादी को छू पाई.


मैं लिख रही हूं एक नया इतिहास,  

जहां मेरी आवाज ही मेरी पहचान का राज.


Rate this content
Log in