“पक्षियों का दर्द”
“पक्षियों का दर्द”
चिड़िया का एक नन्हा बच्चा,
रोज मां से कहता है,
मां मुझे ना जाने क्यों,
एक डर लगा सा रहता है।
दाना लाने जाती हो जब तुम,
कुछ लोग यहां पर आते हैं,
आज नहीं इस वृक्ष को कल काटेंगे,
यह कहकर जाते हैं।
पेड़ अगर यह कट गए तो हम जैसे,
कितने पशु-पक्षी बेघर हो जाएंगे,
घर बिना तो मां हम यूं ही,
तड़प-तड़प कर मर जाएंगे।
वृक्ष बचेंगे तो हवा, नदी, ताल बचेंगे,
पक्षियों के सुर-ताल बचेंगे,
पर्यावरण जल और थल पेड़ों से ही,
आज और कल खुशहाल बचेंगे।
बडे़ ध्यान से सुन,
बच्चे को मां ने यूं समझाया…………,
सच बात है बेटा ये,
वृक्ष बिना हम नहीं बच पाएंगे,
पर आज नहीं तो कल ये मानव भी,
अपनी करनी का फल पाएंगे।
