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Ashutosh Kumar

Others

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Ashutosh Kumar

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नदियाँ

नदियाँ

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ऊँची पहाड़ों से निकल कर यूँ

टेढ़े मेढ़े रास्तों पर

इठलाती हुई हरी भरी वादियों पर

मुस्कुराती ये नदियाँ।


सफेद चादरों की मखमली सेज

तेरी धार में ग़जब की तेज

तू जीवन रक्षक और संघारक 

आँखें बिछाये रहते सुनने को

कलकल की वह तेज़।


हरी भरी प्रकृति की

मानव जीवन संस्कृति की

हर पल राह दिखाती नदियाँ

अपनी मौजूदगी से 

सबकी प्यास बुझाती नदियाँ।


             



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