मेरी कलम
मेरी कलम
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जीवन के हर मोड़ पर जो देती है साथ
वह तो एक कलम है होती है।
सदैव निष्ठा दिखाती
असंख्य शब्द जो स्याही को निगलकर लिखती।
थक कर भी कभी की नहीं शिकायत
हर पड़ाव में बस की है मदद
जीवन के अंतिम पड़ाव पर आकर भी
एक माँ की तरह ,उम्मीद की आशा जगाकर दी।
प्यार किया जिससे मैने सबसे ज्यादा
उसने मुझे माँ की तरह कभी न डाटा।
इस अनमोल रत्न रूपी कलम ने
सिखाया मुझे जीवन का महत्व।
कलम, मात्र तीन शब्द है
लेकिन इनमें बसी शस्त्र की ताक़त है।
जी रखे कलम का रखे मान
वही पाए जीवन में सम्मान।
