हममें हम
हममें हम
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कब से चल पाया ये सख़्त
क्योंकि बदल रहा है वक्त।
ना किसी से कोई तकरार
ना किसी से कोई रफ्तार।
फिर भी चल रहा है रास्ता
हर एक से रखते हम वास्ता।
व्यस्त बने बनाए सुंदर तस्वीर
मिलते वही जो लिखी तकदीर।
आशा रखते हुए हमेशा जीत
हासील होने को मिलें वो मीत।
सब के है अपने अलग से अंदाज़
बस यूं कहे खुद पर हो नाज़।
दिल और दिमाग अलग सा शोर
देखते अनजान से सबकी ओर।
ख़्वाहिश हो किसी की तलाश
रखते अंतिम में एक काश।
कितनों के नाम लिख मुकद्दर
बैठा है हर कोई बने सिकंदर।
हो ना हो तब पूरे होने को ख़्वाब
खुश रहता जब अपना ख़ुदा रब।
राहें चलते हैं करते हुए फ़िक्र
सिखते ही ना किसी से जिक्र।
जाने कितनों के नाम ले के मगर
कहकर लंबी बनी तुम्हारी उमर।
