Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.
Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.

Imtiaz Ali Adab

Others


5.0  

Imtiaz Ali Adab

Others


हमारी प्रतिष्ठा

हमारी प्रतिष्ठा

1 min 275 1 min 275

हमारे घर की रौनक थी 

सुबह उठती थी 

पांव छू कर 

स्कूल जाती थी 

हमारी "प्रतिष्ठा"


कक्षा तीसरी में ही थी 

सीख रही थी लिखना पढ़ना 

जमा, भाग, गुणा करना 

खेलना उसको ख़ूब पसंद था 

कभी गुड़िया को सजाना 

कभी ख़ुद संवरना 


उसने 'ब' से बत्तख़, बकरी, बस, 

कई शब्द सुने थे 

मगर 'ब' से बलात्कार जैसा भी 

एक घिनौना शब्द होता है 

इससे वो अन्जान थी 

वो एकदम नादान थी 

पुष्प सी कोमल 

मात्र 7 बरस की नन्हीं जान थी 


खाना मनपसंद बनवाती थी 

फिर भी कम ही खाती थी 

वो किताबों से भरा बस्ता भी 

सही से उठा नहीं पाती थी 


एक विचार ने 

मुझे अंदर तक झकझोर डाला 

कैसे झेला होगा उसने 

उस दरिन्दे के वहशीपन का भार 


पहले सवाल पूछ-पूछ कर 

परेशान कर देती थी 

पर अब दशा ये है 

वो कोई जवाब नहीं देती 


उसे गुदगुदी करके 

ख़ूब हँसाना चाहता हूँ 

मगर उसके घाव देखकर 

मेरे हाथों की जैसे जान निकल जाती है 


शरीर पर कपड़ों की जगह पट्टियाँ है 

टूटी हुई उसकी हड्डियाँ है 


मन में रह-रह कर एक ही प्रश्न उठता है 

क्या यही हमारी "प्रतिष्ठा" है?


Rate this content
Log in