STORYMIRROR

Gaurav Dhiman

Others

3  

Gaurav Dhiman

Others

दुनिया

दुनिया

1 min
263

ये दुनिया ऐसा ख्वाब है

जो हर किसी के सवालों का जवाब है

शायद तुम नहीं पर खुदा जानता है।


है बैठा हर कोई मंजिल की चाह में 

नहीं मिलती मंजिल किसी को सरल राह में

शायद ख़तम हो गयी खुशियां इस जहाँ में

तुम न मानो पर खुदा मानता है।


वादा कर करम तोड़ने में हर कोई महान है

न जाने क्यों मानता नहीं किसी का कोई एहसान है

मत सता किसी जीव को ये भी तो उसका जहाँ है

फिर न करना बहाना वहां जाने में क्यूंकि खुदा शमशान है।


कोशिश करने में हर किसी का अपमान है

भूल रहा हर इंसांन अपनी पहचान है

समझ रहा खुद को खुदा और खुदा इंसान है।


नहीं सोचता पहले जब करता बुरे काण्ड है

फिर ढूंढ़ता अपने रब को जब फूटता दुखो का भांड है

वो नहीं मिलेगा धरती पे क्यूंकि खुदा ब्रह्माण्ड है।


बढ़ रही पापों की गणना लग गया सच को लकवार है

भुगतेगा वही जिसका तू हकदार है

जला दो ये शब्द अपनी जुबान से की इसका भी खुदा जिम्मेदार है।


पेड़, नदिया, पहाड़, यही धरती का उधार है

जिसमे डाली जान बढ़ा रहा वही धरती का भार है।

बुराई भरी है हर किसी मे नहीं अच्छे किसी के विचार है

बस अब और क्या लिखूं आगे तो खुदा भी शर्मशार है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Gaurav Dhiman