STORYMIRROR

anamika khanna

Abstract

3  

anamika khanna

Abstract

अनकही चिट्ठी

अनकही चिट्ठी

1 min
172

हर अल्फाज में तू था,

 लिखा बहुत कुछ था,


 दिल चाहा कह दूं तुझे,

 हर शब्द की माला में पिरोया था तुझे,

 

न जाने कितने पन्नों में दफन है,

 तेरी यादों की एक तस्वीर,


 लिखा बहुत कुछ हमने,

 कितनी अनकही सी बातें,


 जो दिल ने लिखा पर बोला नहीं,

 तू एक बंद लिफाफा है जो हमने खोला नहीं,

 

एक पत्र जो लिखा पर भेजा नहीं ! 


Rate this content
Log in

Similar english poem from Abstract