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अब घर में नहीं पड़ती जुते-चप्पलों की छाप, सब करीने से बाहर ही खुलने लगे हैं। नहीं फेंके रहते अब कपड़... अब घर में नहीं पड़ती जुते-चप्पलों की छाप, सब करीने से बाहर ही खुलने लगे हैं। नही...
ना जाने बेटी यह हुनर कहाँ से लाती है? ना जाने बेटी यह हुनर कहाँ से लाती है?