पशोपेश में रह रहा हूँ, शायद जी रहा हूँ। मैं वो नहीं जो दिखता हूँ, मैं वो हूँ, जो लिखता हूँ।
ये मैं हूँ जो लिख रहा हूँ, या तुम हो जो पन्नों को भरते हो। ये मैं हूँ जो लिख रहा हूँ, या तुम हो जो पन्नों को भरते हो।
मैंने शाम की सच्चाइयों को देखा है, उसे निर्दयी होते, मरती परछाइयों को देखा है मैंने शाम की सच्चाइयों को देखा है, उसे निर्दयी होते, मरती परछाइयों को देखा है