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मैं कलम हूं उगते सूरज की आस हूँ । मैं कलम हूं उगते सूरज की आस हूँ ।
खामोशी सब बयाँ कर गई। खामोशी सब बयाँ कर गई।
पर सच्चाई में लाना ना सबके बस में नहीं होता।। पर सच्चाई में लाना ना सबके बस में नहीं होता।।