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फीके पड़े दुनिया भर के इत्र दादाजी जो हैं मेरे मित्र। फीके पड़े दुनिया भर के इत्र दादाजी जो हैं मेरे मित्र।
आज वह छिपा हुआ तारा भी देगा दिखाई , जिसने साल भर अंधकार में दिन है बिताई। आज वह छिपा हुआ तारा भी देगा दिखाई , जिसने साल भर अंधकार में दिन है बिताई।
फूल तो बहुत है, सुगंध नहीं है कहीं भी, जड़ें कैद है गमले की दीवारों में। फूल तो बहुत है, सुगंध नहीं है कहीं भी, जड़ें कैद है गमले की दीवारों में।
क्या फर्क पड़ता है वह बच्चा है एक छोटा। क्या फर्क पड़ता है वह बच्चा है एक छोटा।
शीत के प्रताप प्रभाव हो रहा व्याकुल संसार। शीत के प्रताप प्रभाव हो रहा व्याकुल संसार।
बंजर जमीन पर भी कुछ घास उगी है देखो प्रकृति की ममता जाग उठी है। बंजर जमीन पर भी कुछ घास उगी है देखो प्रकृति की ममता जाग उठी है।
हाँ हँसकर, रूठकर, झगड़कर। खुशियों से परिपूर्ण, शीघ्र बीत जाता यह उम्र। हाँ हँसकर, रूठकर, झगड़कर। खुशियों से परिपूर्ण, शीघ्र बीत जाता यह उम्र।
नर अपने सदन में छिप गए क्या शक्ति आ गई इंसानों में नर अपने सदन में छिप गए क्या शक्ति आ गई इंसानों में
अपनी धुन में मानव स्वयं ही मस्त है। अपनी धुन में मानव स्वयं ही मस्त है।
बैठ जाता है ,कहीं पतझड़ के साँझ इसी व्यथा अफसोस में। बैठ जाता है ,कहीं पतझड़ के साँझ इसी व्यथा अफसोस में।